
कुछ महामानव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कहलातें है.
स्टाफ रूम में बैठकर आपस में ही बतियातें है ।
कुछ चायपानी का लुत्फ़ ले रहे राजनीती गरमातें है ।
पर कक्षाएं लेने में वो बहुत-बहुत सकुचाते है ।
महामानवी भी नही है इस मामले में कम
अकड़ दिखाती फिरती थी चारो तरफ हरदम ।
महामानव की बात करे जो ऐसे बिरले होते है .
प्रोफेसर बनकर वो बस घर पर अपने सोते है ।
क्या होगा जो इनमे से गर ऐसा जीव निकल आए ,
जाकर कक्षाएं ग्रहण करे और अध्यापक का धर्म निभाए।
उसकी भी यहाँ दुर्गति होगी ,उस पर भी राजनीती होगी ।
फ़िर ऐसा चक्रव्यूह रचेगा अध्यापक छात्र दोनों फसेगा ।
अभिमन्यु बनेगा कौन-कौन इससे अच्छा है रहो मौन ...................